
🔱 चन्द्रशेखर अष्टकम् !!चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम् |चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम् ‖1 ‖अर्थ – हे चन्द्रशेखर (भगवान जिनका मुकुट चंद्रमा है), कृपया मेरी रक्षा करें|। हे चन्द्रशेखर (भगवान जिनका मुकुट चंद्रमा है), कृपया मुझे बचाएं| रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृङ्ग निकेतनंशिञ्जिनीकृत पन्नगेश्वर मच्युतानल सायकम् |क्षिप्रदग्द पुरत्रयं त्रिदशालयै रभिवन्दितंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ‖ 2 ‖अर्थ – ऐसे भगवान जिन्होंने बहुमूल्य पत्थरों से भरे पर्वत (मेरु पर्वत) को अपना धनुष , जो स्वयं चांदी के पर्वत पर निवास करते है, जिन्होंने नागों के राजा (वासुकी) को अपने धनुष की प्रत्यंचा बनाया था, जिन्होंने भगवान विष्णु को तीर के रूप में इस्तेमाल किया था, जिन्हें तीनो लोकों में सभी प्रणाम करे| मै उन भगवान चंद्रशेखर की शरण लेता हूँ तो यम मेरा क्या कर सकते है?पञ्चपादप पुष्पगन्ध पदाम्बुज द्वयशोभितंफाललोचन जातपावक दग्ध मन्मध विग्रहं |भस्मदिग्द कलेबरं भवनाशनं भव मव्ययंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ‖ 3 ‖अर्थ – जिनके पैर पांच दिव्य वृक्षों के फूलों तथा गंध से चमक रहे है, जिन्होंने अपने माथे पर मौजूद आँख की आग से प्रेम के भगवान, मनमदा को जला दिया| जिनके शरीर पर पवित्र राख या भस्म लगी हुई है, जो दुखों का नाश करने वाले है, जो अनंत काल तक जीवित है| मै उन चंद्रशेखर भगवान की शरण लेता हूँ तो यम मेरा क्या कर सकते है?मत्तवारणमुख्यचर्मकॄतोत्तरीयमनोहरंपङ्कजासनपद्मलोचनपूजितांघ्रिसरोरुहम ।देवसिन्धुतरङ्गसीकर सिक्तशुभ्रजटाधरंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥ 4॥ अर्थ – जो अपनी भुजाओं पर बड़े ओजस्वी हाथी की खाल को वस्त्र के रूप में धारण करते है, जो मंत्रमुग्ध दिखाई देते है, जिनके कमल के समान चरणों की पूजा स्वयं सृष्टि के रचियता ब्रह्मा जी करते है, जो अधिकतर पंकजासन पर विराजमान रहते है| जिनके उलझे हुए बाल आकाश गंगा की लहरों से आने वाली बूंदों से साफ़ हो जाते है| मै उन चंद्रशेखर भगवान की शरण लेता हूँ तो यम मेरा क्या कर सकते है?यक्षराजसखं भगाक्षहरं भुजङ्गविभूषणंशैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेबरम ।क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥5॥ अर्थ – ऐसे भगवान जो कुबेर के निकट है, जो नागों को आभूषण के रूप में धारण करते है| जिनके शरीर का बायाँ भाग पर्वतो की पुत्री देवी पार्वती के शरीर से सुशोभित है| जिनका कंठ नीला है| जिनके हाथ शस्त्र के रूप में कुल्हाड़ी से सुशोभित है| मै उन चंद्रशेखर भगवान की शरण लेता हूँ तो यम मेरा क्या कर सकते है?कुण्डलीकृतकुण्डलेश्वर कुण्डलं वृषवाहनंनारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम ।अन्धकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥6॥ अर्थ – जिनके कानों में कुंडलित सर्प है, जिनका वाहन बैल है| जिनके महानता की प्रसन्नता नारद जी तथा अन्य ऋषि – मुनियों के द्वारा की जाती है| वह सभी लोगों के स्वामी माने जाते है| जिन्होंने अंधक के घमंड को नष्ट किया| मै जिनकी शरणागत के लिए कामना करता हूँ| मै उन चंद्रशेखर भगवान की शरण लेता हूँ तो यम मेरा क्या कर सकते है?भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणंदक्षयज्ञविनाशनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम ।भुक्तिमुक्तिफलप्रदं सकलाघसंघनिबर्हणंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥7॥अर्थ – जो दुखी व्यक्ति के जीवन में एक औषधि के रूप में कार्य करते है, सभी कष्टों और बाधाओं को दूर करने वाले, दक्ष यज्ञ के विध्वंसक, तीन नेत्रों वाले, भक्ति, मोक्ष तथा अन्य इच्छाओं के दाता| मै सभी पापों का नाश करने वाले उन चंद्रशेखर भगवान की शरण लेता हूँ तो यम मेरा क्या कर सकते है?भक्तवत्सलमर्चितं निधिक्षयं हरिदंबरंसर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनुत्तमम ।सोमवारिदभूहुताशनसोमपानिलखाकृतिंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥8॥ अर्थ – जो अपने सभी भक्तों का ध्यान रखते , जिनकी सभी लोग पूजा करते है, जो अपने भक्तों के लिए किसी खजाने के समान है, जो इस सम्पूर्ण दुनिया के परे है, जिनकी तुलना किसी के साथ नहीं की जा सकती है, जो विधिपूर्वक सोमपान करने वाले के रूप में विद्यमान है| मै उन चंद्रशेखर भगवान की शरण लेता हूँ तो यम मेरा क्या कर सकते है?विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परंसंहरन्तमपि प्रपञ्चमशेषलोकनिवासिनम ।कीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमन्वितंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥9॥अर्थ – जो भगवान इस सृष्टि की रचना करते है, जो सृष्टि के पालन पोषण में हमेशा तैयार रहते है| जो उचित समय पर सृष्टि का विनाश भी कर सकते है| जिन्होंने इस संसार में असंख्य लोगों के निवास का स्थान बनाया है| जो हर दिन चंचल रहते है तथा रात्रि गणों के मुखिया है, जो उन गणों में से एक की भांति ही व्यवहार करते है| मै उन चंद्रशेखर भगवान की शरण लेता हूँ तो यम मेरा क्या कर सकते है?मृत्युभीतमृकण्डुसूनुकृतस्तवं शिवसन्निधौयत्र कुत्र च यः पठेन्न हि तस्य मृत्युभयं भवेत ।पूर्णमायुररोगतामखिलार्थसंपदमादरातचन्द्रशेखर एव तस्य ददाति मुक्तिमयत्नतः॥10॥अर्थ – जो भी मृत्यु से भयभीत व्यक्ति मृकुंद के पुत्र द्वारा लिखी इस चन्द्रशेखर अष्टकम को भगवान शिव के मंदिर में पढता है तो इसके माध्यम से उस व्यक्ति के मन से मृत्यु का भय खत्म हो जाता है| उस पूर्ण रूप से स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होती है| जब कोई मुक्ति पाने का प्रयास करता है तो भगवान शिव उसे सम्पूर्ण जीवन धन तथा अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करते है| इति श्रीचन्द्रशेखराष्टकस्तोत्रं संपूर्णम् ॥ ००००००००००००००००
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