बाबा गोरखनाथ जी का दिव्य शाबर मन्त्र
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यह मन्त्र मेरा स्वयं अनुभूत है और बहुत ही दिव्य मन्त्र है। इसको कोई भी व्यक्ति कर सकता है, इसका कोई विशेष विधि विधान नहीं है जिसका मन सच्चा हो वह इसको करे। शिवस्वरूप गोरखनाथ जी सब बिगड़े काम सवार देंगे आपके। जिनका कोई गुरु नहीं है, वो अपने इष्ट देवता का ध्यान करके इस मन्त्र का जाप करे। फिर देखना इस मन्त्र का फल।
मन्त्र-
ॐ गुरु जी गोरख यति मच्छेन्द्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलवेला, कानो कुण्डल गले मैं नादी, हाथ तिरसुल, नाथ है आदि अलख पुरुष को करो, आदेश, जन्म जन्म के काटो क्लेश, भगवा भेष हाथ मैं खप्पड़ भैरव शिव का चेला, जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे फिर वहां मेला, शिव का धुन गोरख तापे, काल कंटक थर थर कांपे, मेरी रक्षा करे नवनाथ, राम दूत हनुमन्त रिद्धि सिद्धि आँगन विराजये, माई अन्नपूर्णा सुखवन्त, शब्द साँचा पिंड कांचा चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।।
बाबा गोरखनाथ जी का दिव्य शाबर मंत्र 
यह मंत्र श्रद्धा, साधना और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है।
सच्चे मन, सकारात्मक भावना और ईश्वर स्मरण के साथ इसका जाप किया जाता है। ![]()
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मंत्र ![]()
ॐ गुरु जी गोरख यति मत्स्येन्द्र का चेला
शिव के रूप में दिखे अलबेला, कानों कुण्डल
गले में नादी, हाथ तिरसूल, नाथ है आदि
अलख पुरुष को करो आदेश, जन्म जन्म
के काटो क्लेश, भगवा भेष हाथ में खप्पड़
भैरव शिव का चेला, जहाँ जहाँ जाऊँ नगर
डगर लगे फिर वहाँ मेला, शिव का धुन गोरख
तापे, काल कंटक थर थर काँपे, मेरी रक्षा करे
नवनाथ, राम दूत हनुमन्त सिद्ध सिद्ध आँगन
विराजे, माई अन्नपूर्णा सुखवन्त, शब्द साँचा
पिंड काँचा चलो मंत्र ईश्वरो वाचा॥
श्रद्धा और सद्भावना के साथ जाप करें
सकारात्मक ऊर्जा और मन की शांति हेतु स्मरण करें
“अलख निरंजन” की भावना से ध्यान करें
जय गुरु गोरखनाथ
बाबा गोरखनाथ जी का दिव्य शाबर मंत्र ![]()
यह मंत्र श्रद्धा, साधना और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है।
सच्चे मन, सकारात्मक भावना और ईश्वर स्मरण के साथ इसका जाप किया जाता है। ![]()
मंत्र ![]()
ॐ गुरु जी गोरख यति मत्स्येन्द्र का चेला
शिव के रूप में दिखे अलबेला, कानों कुण्डल
गले में नादी, हाथ तिरसूल, नाथ है आदि
अलख पुरुष को करो आदेश, जन्म जन्म
के काटो क्लेश, भगवा भेष हाथ में खप्पड़
भैरव शिव का चेला, जहाँ जहाँ जाऊँ नगर
डगर लगे फिर वहाँ मेला, शिव का धुन गोरख
तापे, काल कंटक थर थर काँपे, मेरी रक्षा करे
नवनाथ, राम दूत हनुमन्त सिद्ध सिद्ध आँगन
विराजे, माई अन्नपूर्णा सुखवन्त, शब्द साँचा
पिंड काँचा चलो मंत्र ईश्वरो वाचा॥
श्रद्धा और सद्भावना के साथ जाप करें
सकारात्मक ऊर्जा और मन की शांति हेतु स्मरण करें
“अलख निरंजन” की भावना से ध्यान करें
जय गुरु गोरखनाथ

विधि – सात कुओ या किसी नदी से सात बार जल लाकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए रोगी को स्नान करवाए तो उसके ऊपर से सभी प्रकार का किया-कराया उतर जाता है.
मंत्र
ॐ वज्र में कोठा, वज्र में ताला, वज्र में बंध्या दस्ते द्वारा, तहां वज्र का लग्या किवाड़ा, वज्र में चौखट, वज्र में कील, जहां से आय, तहां ही जावे, जाने भेजा, जांकू खाए, हमको फेर न सूरत दिखाए, हाथ कूँ, नाक कूँ, सिर कूँ, पीठ कूँ, कमर कूँ, छाती कूँ जो जोखो पहुंचाए, तो गुरु गोरखनाथ की आज्ञा फुरे, मेरी भक्ति गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र इश्वरोवाचा.
मन्त्रः-
“ॐ गों गोरक्षनाथ महासिद्धः, सर्व-व्याधि विनाशकः ।
विस्फोटकं भयं प्राप्ते, रक्ष रक्ष महाबल ।। १।।
यत्र त्वं तिष्ठते देव, लिखितोऽक्षर पंक्तिभिः ।
रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति, वातपित्त कफोद्भवाः ।। २।।
तत्र राजभयं नास्ति, यान्ति कर्णे जपाः क्षयम् ।
शाकिनी भूत वैताला, राक्षसा प्रभवन्ति न ।। ३।।
नाऽकाले मरणं तस्य, न च सर्पेण दश्यते ।
अग्नि चौर भयं नास्ति, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं गों ।। ४।।
ॐ घण्टाकर्णो नमोऽस्तु ते ॐ ठः ठः ठः स्वाहा ।।”
विधिः- यह मंत्र तैंतीस हजार या छत्तीस हजार जाप कर सिद्ध करें । इस मंत्र के प्रयोग के लिए इच्छुक उपासकों को पहले गुरु-पुष्य, रवि-पुष्य, अमृत-सिद्धि-योग, सर्वार्त-सिद्धि-योग या दिपावली की रात्रि से आरम्भ कर तैंतीस या छत्तीस हजार का अनुष्ठान करें । बाद में कार्य साधना के लिये प्रयोग में लाने से ही पूर्णफल की प्राप्ति होना सुलभ होता है ।
विभिन्न प्रयोगः- इस को सिद्ध करने पर केवल इक्कीस बार जपने से राज्य भय, अग्नि भय, सर्प, चोर आदि का भय दूर हो जाता है । भूत-प्रेत बाधा शान्त होती है । मोर-पंख से झाड़ा देने पर वात, पित्त, कफ-सम्बन्धी व्याधियों का उपचार होता है ।
१॰ मकान, गोदाम, दुकान घर में भूत आदि का उपद्रव हो तो दस हजार जप तथा दस हजार गुग्गुल की गोलियों से हवन किया जाये, तो भूत-प्रेत का भय मिट जाता है । राक्षस उपद्रव हो, तो ग्यारह हजार जप व गुग्गुल से हवन करें ।
२॰ अष्टगन्ध से मंत्र को लिखकर गेरुआ रंग के नौ तंतुओं का डोरा बनाकर नवमी के दिन नौ गांठ लगाकर इक्कीस बार मंत्रित कर हाथ के बाँधने से चौरासी प्रकार के वायु उपद्रव नष्ट हो जाते हैं ।
३॰ इस मंत्र का प्रतिदिन १०८ बार जप करने से चोर, बैरी व सारे उपद्रव नाश हो जाते हैं तथा अकाल मृत्यु नहीं होती तथा उपासक पूर्णायु को प्राप्त होता है ।
४॰ आग लगने पर इक्कीस बार पानी को अभिमंत्रित कर छींटने से आग शान्त होती है ।
५॰ मोर-पंख से इस मंत्र द्वारा झाड़े तो शारीरिक नाड़ी रोग व श्वेत कोढ़ दूर हो जाता है ।
६॰ कुंवारी कन्या के हाथ से कता सूत के सात तंतु लेकर इक्कीस बार अभिमंत्रित करके धूप देकर गले या हाथ में बाँधने पर ज्वर, एकान्तरा, तिजारी आदि चले जाते हैं ।
७॰ सात बार जल अभिमंत्रित कर पिलाने से पेट की पीड़ा शान्त होती है ।
८॰ पशुओं के रोग हो जाने पर मंत्र को कान में पढ़ने पर या अभिमंत्रित जल पिलाने से रोग दूर हो जाता है । यदि घंटी अभिमंत्रित कर पशु के गले में बाँध दी जाए, तो प्राणि उस घंटी की नाद सुनता है तथा निरोग रहता है ।
९॰ गर्भ पीड़ा के समय जल अभिमंत्रित कर गर्भवती को पिलावे, तो पीड़ा दूर होकर बच्चा आराम से होता है, मंत्र से १०८ बार मंत्रित करे ।
१०॰ सर्प का उपद्रव मकान आदि में हो, तो पानी को १०८ बार मंत्रित कर मकानादि में छिड़कने से भय दूर होता है । सर्प काटने पर जल को ३१ बार मंत्रित कर पिलावे तो विष दूर हो ।
।। जय हनुमान ।।हनुमान मोहिनी मंत्र:-
वशीकरण प्रयोग अत्याधिक महत्वपूर्ण है, इसे तंत्र के द्वारा और मंत्र के द्वारा भी सम्पन्न किया जाता है, यो तो तंत्र मंत्र के
ग्रन्थो मे वशीकरण से सम्बन्धित सैकडो प्रयोग है, लेकिन नाथ सांप्रदाय के पास जो वशीकरण प्रयोग है वे बन्दूक की गोली से भी तीव्र प्रभाव करने वाले और अचुक होते है , प्रयोग करते ही उसका परिणाम प्रप्त हो जाता है.
शुक्रवार की रात 9 बजे हनुमान मंदिर जाकर हनुमान जी के चरणो मे सुखा हुआ सिंदूर चढाये और एक नारियल रख कर अपने दिल की भावनाये हनुमान जी को बताये.दूसरे दिन शनिवार रात ठिक उसी हनुमान मंदिर जाकर जहा आपने सिंदूर चढाया था वही का कोई भी सिंदूर उठाकर अपने घर ले आये.इस क्रिया मे किसी भी व्यक्ति का रोक-टोक नही होना चाहिये अब घर आने के बाद लाल कपडे पर हनुमान जी का चित्र स्थापित करे और हनुमान चालिसा का एक पाठ करे ताकी हनुमत कृपा प्राप्त हो
हनुमान मोहिनी मंत्र:-
ll ओम नमो महावीर,हनुमन्त वीर l धाय-धाय चलो,अपनी मोहिनी चलाओ,अमुक के नैन बाँध,मन बाँध,काया बाँध,घर बाँध,द्वार बाँध मेरे लिये,ना बाँधे तो मेरी आण-मेरे गुरू की आण,छु वाचापुरी ll
मंत्र से कार्य तो होता है परंतु जिनके जीवन मे कोई गुरू ना हो तो उनके लिये मंत्र का कोई असर नही होगा

