- * वशीकरण के लिए लौंग और इलायची का प्रयोग करना चाहिए।
- किसी भी फल की कामना के लिए सुपारी का प्रयोग करना चाहिए।
- * अन्न या धन वृद्धि के लिए गुड़ का प्रयोग करना चाहिए।
- * सर्वसिद्धि के लिए ताम्बुल का प्रयोग करना चाहिए।
- *नौकरी प्राप्ती हेतु गुड का प्रयोग करे l
विनियोग:-
न्यास:-
अंग न्यास:-
ध्यान:-
बलि मंत्र:-
उच्छिष्ट गणपति साधना कब की जाती है?
परंपरागत रूप से गणपति साधना के लिए बुधवार को शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त गणेश चतुर्थी भी गणपति उपासना के लिए विशेष महत्व रखती है।
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भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को व्यापक रूप से गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर भगवान गणेश की पूजा, मंत्र-जप, ध्यान और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
हालांकि, किसी विशिष्ट तांत्रिक साधना के लिए शुभ तिथि, समय, दिशा, संकल्प और विधि गुरु-परंपरा के अनुसार निर्धारित की जा सकती है।
क्या उच्छिष्ट गणपति साधना दिन या रात में की जा सकती है?
विभिन्न साधना-परंपराओं में समय को लेकर अलग-अलग नियम मिलते हैं। कुछ परंपराएं दिन और रात दोनों समय साधना की अनुमति बताती हैं, जबकि विशेष तांत्रिक प्रयोगों के लिए निश्चित समय निर्धारित किया जाता है।
इसलिए किसी भी उच्छिष्ट गणपति प्रयोग को शुरू करने से पहले अपने गुरु या आचार्य से साधना का उचित समय और विधि अवश्य पूछें।
उच्छिष्ट गणपति का ध्यान
परंपरागत ध्यान-वर्णन में उच्छिष्ट गणपति को रक्तवर्ण, त्रिनेत्र और चतुर्भुज स्वरूप में ध्यान किया जाता है। उनके हाथों में पाश, अंकुश, मोदक-पात्र तथा अन्य आयुधों का वर्णन मिलता है।
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ध्यान का मूल उद्देश्य साधक के मन को एकाग्र करना और उपास्य देवता के स्वरूप पर चित्त को स्थिर करना है।
साधना के दौरान केवल मंत्र-जप ही नहीं, बल्कि भाव, श्रद्धा, संकल्प और एकाग्रता को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
उच्छिष्ट गणपति मंत्र
आपके द्वारा दिए गए मंत्र का प्रचलित रूप इस प्रकार है:
ॐ गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।
Om Gam Hasti Pishachi Likhe Swaha
कुछ तांत्रिक परंपराओं में मंत्र के प्रारंभ में ‘गं’ बीज मंत्र का प्रयोग किया जाता है। बीज मंत्रों के उच्चारण और विनियोग की परंपरा गुरु-परंपरा के अनुसार बदल सकती है।
इसलिए मंत्र का जप शुरू करने से पहले उसके उच्चारण, संख्या, न्यास और विनियोग की सही परंपरा किसी योग्य आचार्य से सीखना उचित है।
उच्छिष्ट गणपति साधना में विनियोग
परंपरागत पाठों में विनियोग का उद्देश्य साधना के ऋषि, छंद, देवता और साधक के अभीष्ट उद्देश्य का संकल्प करना होता है।
आपके दिए पाठ में विनियोग का भाव इस प्रकार है:
“ॐ अस्य श्री उच्छिष्ट गणपति मंत्रस्य कंकोल ऋषिः, विराट् छन्दः, श्री उच्छिष्ट गणपति देवता, मम अभीष्ट अथवा सर्वाभीष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः।”
यहां साधक अपनी कामना के अनुसार संकल्प करता है।
महत्वपूर्ण: मंत्र-विनियोग और न्यास की शुद्ध पद्धति परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए इसे गुरु से प्राप्त विधि के अनुसार ही करना चाहिए।
उच्छिष्ट गणपति अंगन्यास
तांत्रिक साधना में न्यास का उद्देश्य मंत्र-शक्ति को साधक के शरीर के विभिन्न अंगों से संबंधित करना माना जाता है।
आपके मूल पाठ में दिए गए अंगन्यास में निम्न मंत्र-क्रम मिलता है:
- ॐ हस्ति अंगुष्ठाभ्यां नमः — हृदयाय नमः
- ॐ पिशाचि तर्जनीभ्यां नमः — शिरसे स्वाहा
- ॐ लिखे मध्यमाभ्यां नमः — शिखायै वषट्
- ॐ स्वाहा अनामिकाभ्यां नमः — कवचाय हुं
- ॐ हस्ति पिशाचि लिखे कनिष्ठिकाभ्यां नमः — नेत्रत्रयाय वौषट्
- ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा — करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः — अस्त्राय फट्
न्यास जैसी तांत्रिक प्रक्रियाएं केवल लिखित निर्देश पढ़कर करने के बजाय गुरु से प्रत्यक्ष सीखना अधिक सुरक्षित और उचित है।
विशेष कामनाओं के लिए पारंपरिक प्रयोग
विभिन्न तांत्रिक परंपराओं में अलग-अलग कामनाओं के लिए अलग-अलग पूजन-सामग्री का उल्लेख मिलता है। आपके मूल पाठ में निम्न प्रयोग बताए गए हैं:
वशीकरण संबंधी प्रयोग
कुछ परंपराओं में लौंग और इलायची का उल्लेख मिलता है।
ऐसे प्रयोगों को किसी व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा या अधिकार को नियंत्रित करने के साधन के रूप में नहीं लेना चाहिए। इन्हें केवल पारंपरिक धार्मिक संदर्भ में समझना चाहिए।
किसी अभीष्ट फल की कामना
सुपारी का प्रयोग कुछ परंपराओं में संकल्प एवं कामना से जोड़ा गया है।
अन्न एवं धन वृद्धि
गुड़ का प्रयोग समृद्धि संबंधी संकल्प में किया जाता है।
सर्वसिद्धि
ताम्बूल का उल्लेख कुछ पारंपरिक प्रयोगों में मिलता है।
नौकरी एवं आजीविका
नौकरी या आजीविका में सफलता की कामना के लिए भी गणपति उपासना की जाती है। गुड़ जैसे नैवेद्य का प्रयोग कुछ परंपराओं में बताया गया है।
इन सभी प्रयोगों में सामग्री से अधिक महत्वपूर्ण साधक की श्रद्धा, संकल्प, उचित विधि और गुरु-निर्देशन माना जाना चाहिए।
उच्छिष्ट गणपति साधना में जप और हवन
कुछ पारंपरिक साधना-विधियों में निश्चित अवधि तक प्रतिदिन मंत्र-जप तथा उसके बाद दशांश हवन का विधान बताया जाता है।
आपके मूल पाठ में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी से शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तक नियमित जप और दशांश हवन का उल्लेख है।
लेकिन मंत्र-जप की संख्या, अवधि और हवन-विधि हर साधक के लिए समान नहीं होती। साधना की प्रकृति, संकल्प और गुरु-परंपरा के अनुसार इसमें परिवर्तन हो सकता है।
इसलिए वेबसाइट पर इसे अनिवार्य सार्वभौमिक नियम के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय “कुछ परंपराओं में ऐसा विधान मिलता है” कहना अधिक उचित और विश्वसनीय है।
उच्छिष्ट गणपति साधना में नैवेद्य और बलि
तांत्रिक परंपराओं में ‘बलि’ शब्द का अर्थ हमेशा हिंसक या पशुबलि नहीं होता। कई धार्मिक परंपराओं में प्रतीकात्मक नैवेद्य अथवा फल-पुष्प अर्पण को बलि के रूप में समझा जाता है।
आपके मूल पाठ में अनार या गुड़हल के पुष्प का उल्लेख मिलता है।
ऐसी किसी भी प्रक्रिया को स्थानीय धार्मिक परंपरा और गुरु के निर्देश के अनुसार ही अपनाना चाहिए।
तंत्र-बाधा निवारण के लिए गणपति मंत्र
आपके द्वारा दिया गया एक मंत्र तंत्र-बाधा निवारण के उद्देश्य से बताया गया है:
ॐ गं हूं तंत्र बाधा निवारणाय श्रीं गणेशाय स्वाहा।
कुछ परंपराओं में इस प्रकार के मंत्र का सीमित अवधि तक जप बताया जाता है।
हालांकि, किसी भी आध्यात्मिक मंत्र को चिकित्सा, कानूनी, आर्थिक या सुरक्षा संबंधी समस्या का एकमात्र समाधान नहीं मानना चाहिए। यदि जीवन में वास्तविक खतरा, धोखाधड़ी, स्वास्थ्य समस्या या मानसिक तनाव जैसी परिस्थिति हो तो संबंधित विशेषज्ञ की सहायता भी आवश्यक है।
उच्छिष्ट गणपति साधना में ‘उच्छिष्ट’ का क्या अर्थ है?
यह इस साधना से जुड़े सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक है।
‘उच्छिष्ट’ शब्द का सामान्य अर्थ बचा हुआ या जूठा माना जाता है, लेकिन तांत्रिक परंपराओं में इसका अर्थ संदर्भ के अनुसार अधिक गहरा और प्रतीकात्मक हो सकता है।
आपके दिए हुए पाठ में इसे जीवन की अपूर्ण इच्छाओं, अभावों और कामनाओं की पूर्ति से जोड़ा गया है।
इसलिए इस शब्द को केवल सामान्य भाषा के अर्थ में समझना उचित नहीं होगा। तांत्रिक साधना में किसी विशेष शब्द का वास्तविक अर्थ उसकी संपूर्ण साधना-परंपरा और संदर्भ से समझा जाता है।
क्या उच्छिष्ट गणपति साधना कठिन है?
यह साधना सामान्य गणेश पूजा से अलग मानी जाती है क्योंकि इसमें कुछ तांत्रिक प्रक्रियाएं, मंत्र, न्यास, विनियोग और विशेष नियम शामिल हो सकते हैं।
इसी कारण इसे केवल किसी वेबसाइट या पुस्तक में पढ़कर स्वयं प्रयोग करने की बजाय गुरु-दीक्षा अथवा योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में करना बेहतर है।
विशेषकर यदि साधना में न्यास, पुरश्चरण, हवन या कोई विशेष तांत्रिक प्रयोग शामिल हो, तो उसकी सही प्रक्रिया सीखना आवश्यक है।
उच्छिष्ट गणपति साधना करते समय सावधानियां
इस साधना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात सावधानी है।
1. गुरु का मार्गदर्शन लें
तांत्रिक मंत्र-साधना में उच्चारण, संकल्प, नियम और साधना-पद्धति महत्वपूर्ण होते हैं।
2. बिना समझे प्रयोग न करें
किसी किताब, सोशल मीडिया पोस्ट या इंटरनेट लेख को देखकर कठिन तांत्रिक प्रयोग शुरू करना उचित नहीं है।
3. मंत्र का शुद्ध उच्चारण सीखें
मंत्र की ध्वनि और उच्चारण साधना की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं।
4. साधना को दिखावे का माध्यम न बनाएं
आध्यात्मिक साधना का उद्देश्य आत्मअनुशासन, एकाग्रता और ईश्वर-चिंतन होना चाहिए।
5. परिणाम की गारंटी का दावा न करें
साधना को नौकरी, धन, व्यापार, विवाह या किसी अन्य परिणाम की निश्चित गारंटी के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
6. नकारात्मक उद्देश्य से बचें
किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने, उसकी स्वतंत्र इच्छा को नियंत्रित करने या प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से किसी भी तांत्रिक प्रयोग का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
उच्छिष्ट गणपति साधना और सामान्य गणेश पूजा में अंतर
| विषय | सामान्य गणेश पूजा | उच्छिष्ट गणपति साधना |
|---|---|---|
| स्वरूप | सामान्य गणपति | विशिष्ट तांत्रिक स्वरूप |
| उद्देश्य | मंगल, बुद्धि, विघ्न निवारण | विशेष कामना एवं साधना-सिद्धि |
| प्रक्रिया | अपेक्षाकृत सरल | परंपरा के अनुसार अधिक विशिष्ट |
| मंत्र | सामान्य गणेश मंत्र | विशिष्ट तांत्रिक मंत्र |
| न्यास | सामान्यतः आवश्यक नहीं | कुछ विधियों में महत्वपूर्ण |
| गुरु मार्गदर्शन | सामान्य पूजा में वैकल्पिक | विशेष प्रयोगों में महत्वपूर्ण |
| साधना नियम | सरल हो सकते हैं | परंपरा के अनुसार कठोर हो सकते हैं |
उच्छिष्ट गणपति साधना किसके लिए की जाती है?
परंपरागत रूप से लोग गणपति उपासना को विभिन्न उद्देश्यों से करते हैं, जैसे:
- कार्य में आने वाली बाधाओं के लिए
- व्यापारिक प्रगति की कामना
- आर्थिक स्थिरता
- नौकरी और करियर में सफलता
- किसी महत्वपूर्ण कार्य की पूर्णता
- बुद्धि और एकाग्रता
- आध्यात्मिक उन्नति
- नकारात्मकता से संरक्षण
- विशेष मनोकामना
लेकिन साधना को अपने जीवन के वास्तविक प्रयासों का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। संकल्प के साथ कर्म, अनुशासन और सही निर्णय भी आवश्यक हैं।
क्या उच्छिष्ट गणपति साधना तुरंत परिणाम देती है?
कुछ तांत्रिक साहित्य और लोक-मान्यताओं में इस साधना से शीघ्र फल प्राप्त होने की बातें कही जाती हैं। लेकिन प्रत्येक व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है।
आध्यात्मिक साधना में परिणाम को निश्चित समय सीमा में बांधना उचित नहीं है। साधना के परिणाम श्रद्धा, अनुशासन, साधना-पद्धति, मानसिक एकाग्रता और व्यक्ति की परिस्थितियों से जुड़े हो सकते हैं।
इसलिए “एक दिन में निश्चित सफलता” या “तुरंत धन प्राप्ति” जैसे दावों से बचना चाहिए।
उच्छिष्ट गणपति साधना के लिए गुरु क्यों आवश्यक माना जाता है?
तांत्रिक साधना केवल मंत्र पढ़ लेने का नाम नहीं है। इसमें मंत्र की परंपरा, उच्चारण, न्यास, विनियोग, ध्यान, संकल्प, जप संख्या और साधना के नियमों का महत्व होता है।
योग्य गुरु साधक को यह समझने में सहायता करता है कि:
- कौन-सा मंत्र उपयुक्त है
- किस प्रकार संकल्प करना है
- मंत्र का उच्चारण कैसे करना है
- कौन-सी साधना किस परिस्थिति में करनी है
- किन नियमों का पालन करना आवश्यक है
- साधना के दौरान आने वाली कठिनाइयों से कैसे निपटना है
इसीलिए उच्छिष्ट गणपति जैसे विशेष तांत्रिक प्रयोग में गुरु-आज्ञा और मार्गदर्शन को प्राथमिकता देना चाहिए।
निष्कर्ष
उच्छिष्ट गणपति साधना गणपति उपासना की एक विशिष्ट तांत्रिक परंपरा से जुड़ी मानी जाती है। विभिन्न साधना-ग्रंथों और गुरु-परंपराओं में इसके मंत्र, ध्यान, न्यास, जप, हवन और कामना-विशेष प्रयोगों के अलग-अलग विधान मिलते हैं।
इस साधना को कार्यसिद्धि, विघ्न निवारण, आर्थिक उन्नति, समृद्धि और विशेष मनोकामना से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन लाभों को धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं के रूप में समझना चाहिए, न कि निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में।
यदि आप उच्छिष्ट गणपति साधना करना चाहते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण बात है—सही मंत्र, सही विधि, उचित संकल्प और योग्य गुरु का मार्गदर्शन।
आध्यात्मिक साधना में श्रद्धा के साथ विवेक और अनुशासन भी उतने ही आवश्यक हैं।
उच्छिष्ट गणपति साधना के लिए मार्गदर्शन
यदि आपको इस साधना के मंत्र, संकल्प, साधना-पद्धति या अपनी विशेष कामना के अनुसार उपयुक्त गणपति उपासना को लेकर मार्गदर्शन चाहिए, तो किसी योग्य गुरु या आचार्य से व्यक्तिगत परामर्श लेना उचित रहेगा।
ॐ गं गणपतये नमः।
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. उच्छिष्ट गणपति साधना क्या है?
उच्छिष्ट गणपति साधना भगवान गणेश के एक विशिष्ट तांत्रिक स्वरूप की उपासना है। विभिन्न परंपराओं में इसे विशेष मनोकामना, कार्यसिद्धि, विघ्न निवारण और समृद्धि से जोड़ा जाता है।
2. उच्छिष्ट गणपति का मुख्य मंत्र कौन-सा है?
प्रचलित तांत्रिक परंपराओं में एक मंत्र है—“ॐ गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।” मंत्र का जप गुरु-परंपरा और उचित विधि के अनुसार करना चाहिए।
3. क्या उच्छिष्ट गणपति साधना बुधवार को की जा सकती है?
बुधवार को गणपति उपासना के लिए शुभ माना जाता है। विशेष साधना के लिए गणेश चतुर्थी सहित अन्य तिथियों का भी उल्लेख विभिन्न परंपराओं में मिलता है।
4. क्या गणेश चतुर्थी पर उच्छिष्ट गणपति साधना की जा सकती है?
कुछ परंपराओं में गणेश चतुर्थी को विशेष गणपति साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। तांत्रिक साधना की विशिष्ट विधि के लिए गुरु से मार्गदर्शन लेना चाहिए।
5. उच्छिष्ट गणपति साधना से क्या लाभ होते हैं?
परंपरागत मान्यताओं में कार्यसिद्धि, विघ्न निवारण, आर्थिक उन्नति, समृद्धि, इच्छा पूर्ति और आध्यात्मिक संरक्षण जैसे लाभ बताए जाते हैं।
6. क्या उच्छिष्ट गणपति साधना से तुरंत धन प्राप्त हो सकता है?
ऐसा निश्चित रूप से कहना उचित नहीं है। धार्मिक परंपराओं में शीघ्र फल की मान्यताएं मिलती हैं, लेकिन किसी भी साधना से तत्काल आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं दी जा सकती।
7. क्या यह साधना घर पर की जा सकती है?
सामान्य गणेश पूजा घर पर की जा सकती है, लेकिन विशेष तांत्रिक उच्छिष्ट गणपति प्रयोग में गुरु या योग्य आचार्य का मार्गदर्शन लेना अधिक उचित है।
8. क्या उच्छिष्ट गणपति साधना के लिए गुरु जरूरी है?
विशेष तांत्रिक प्रयोगों, न्यास, पुरश्चरण और हवन आदि के लिए गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत उपयोगी और परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
9. क्या उच्छिष्ट गणपति साधना तंत्र-बाधा के लिए की जाती है?
कुछ तांत्रिक परंपराओं में गणपति के मंत्रों को बाधा-निवारण और संरक्षण से जोड़ा गया है। वास्तविक जीवन की सुरक्षा या गंभीर समस्याओं में उचित व्यावहारिक सहायता भी लेनी चाहिए।
10. उच्छिष्ट शब्द का क्या अर्थ है?
सामान्य अर्थ में ‘उच्छिष्ट’ का संबंध जूठे या बचे हुए पदार्थ से हो सकता है, लेकिन तांत्रिक संदर्भ में इसका अर्थ परंपरा और साधना के संदर्भ के अनुसार अलग हो सकता है।
11. क्या उच्छिष्ट गणपति साधना में हवन आवश्यक है?
कुछ विशेष साधना-विधियों में जप के बाद दशांश हवन का विधान मिलता है। यह सभी साधकों के लिए सार्वभौमिक नियम नहीं माना जाना चाहिए; गुरु द्वारा बताई गई विधि का पालन करना उचित है।
12. क्या उच्छिष्ट गणपति साधना किसी भी मनोकामना के लिए की जा सकती है?
परंपरागत रूप से इसे विभिन्न अभीष्ट कामनाओं से जोड़ा गया है। फिर भी कामना शुभ, नैतिक और किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने वाली न हो, यह महत्वपूर्ण है।
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1. मूल मंत्र
॥ ॐ गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ॥
पद-विभाजन:
ॐ । गं । हस्ति । पिशाचि । लिखे । स्वाहा ॥
Roman:
Om Gaṁ Hasti Piśāci Likhe Svāhā
यहां “गं” गणपति का बीजाक्षर है। आपके लेख में इसे अलग से समझाना उपयोगी रहेगा।
2. ऋष्यादि न्यास
वेबसाइट पर इसे इस प्रकार साफ-सुथरे रूप में दिखा सकते हैं:
ॐ अस्य श्रीउच्छिष्टगणपति-मन्त्रस्य कंकोल ऋषये नमः — शिरसि।
ॐ विराट् छन्दसे नमः — मुखे।
ॐ श्रीउच्छिष्टगणपति देवतायै नमः — हृदये।
ॐ सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगाय नमः — सर्वाङ्गे।
सरल अर्थ:
- ऋषये नमः — शिरसि: मंत्र के ऋषि को मस्तक में स्मरण।
- छन्दसे नमः — मुखे: मंत्र के छंद का मुख में न्यास।
- देवतायै नमः — हृदये: श्रीउच्छिष्ट गणपति का हृदय में ध्यान।
- विनियोगाय नमः — सर्वाङ्गे: अपने अभीष्ट की सिद्धि के लिए संपूर्ण साधना का संकल्प।
3. करन्यास और अंगन्यास को अलग रखें
आपके मूल लेख में यह भाग:
ॐ हस्ति अंगुष्ठाभ्यां नमः हृदयाय नमः
ॐ पिशाचि तर्जनीभ्यां नमः शिरसे स्वाहा…
दरअसल करन्यास और अंगन्यास के दो अलग हिस्सों के मिश्रण जैसा दिखाई देता है। इसलिए इसे एक ही पंक्ति में प्रकाशित करना ठीक नहीं होगा।
करन्यास में सामान्यतः मंत्र-पदों के साथ अंगुष्ठ, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठिका और करतल-पृष्ठ का क्रम आता है।
अंगन्यास में हृदय, शिरः, शिखा, कवच, नेत्रत्रय और अस्त्र का क्रम आता है।
उदाहरण के रूप में संरचना इस तरह होगी:
करन्यास
- ॐ … अंगुष्ठाभ्यां नमः।
- ॐ … तर्जनीभ्यां नमः।
- ॐ … मध्यमाभ्यां नमः।
- ॐ … अनामिकाभ्यां नमः।
- ॐ … कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
- ॐ … करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
अंगन्यास
- ॐ … हृदयाय नमः।
- ॐ … शिरसे स्वाहा।
- ॐ … शिखायै वषट्।
- ॐ … कवचाय हुं।
- ॐ … नेत्रत्रयाय वौषट्।
- ॐ … अस्त्राय फट्।
लेकिन इन रिक्त स्थानों में मंत्र-पद अपनी ओर से भरना उचित नहीं है, क्योंकि आपके दिए हुए पाठ में पाठभेद/टाइपिंग त्रुटि की संभावना है।






