Sale!
, , , ,

Rahu Tantric Mantra Practice

Original price was: ₹5,100.00.Current price is: ₹5,000.00.

राहु तांत्रिक मंत्र:Rahu Tantric Mantra Practice

Rahu Tantric Mantra Practice: *”ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥”*
मंत्र विनियोग
ॐ अस्य श्री राहु तांत्रिक मंत्रस्य बृहस्पति ऋषिः गायत्री छन्दः राहु देवता भ्रां बीजम् भ्रीं शक्तिः भ्रौं कीलकम् राहु ग्रह मम यजमानस्य *जैस्मीन सिंह चिंडालिया गौत्र उत्पन्न* वैवाहिक जीवन सुख शांति समृद्धि प्राप्ति राहु ग्रह अशुभ दोष निवृत्ति हेतु आयु आरोग्य यश कीर्ति पुष्टि धन-धन्य प्राप्ति हेतु राहु ग्रह प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥
*ध्यान*
नीलवर्णं खड्गपाणिं
सिंहिकागर्भसम्भवम्।
पातालवासिनं घोरं
राहुं ध्यायामि सर्वदा॥
*ऋषिन्यास*
1. ॐ कश्यप ऋषये नमः शिरसि
2. अनुष्टुप्छन्दसे नमः मुखे
3. राहुर्देवतायै नमः हृदि
4. भ्रां भ्रीं भ्रौं बीजाय नमः गुह्ये
5. सः शक्तये नमः पादयोः
6. नमः कीलकाय नमः सर्वाङ्गे
*कर-न्यास*
1. ॐ भ्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः
2. भ्रीं तर्जनीभ्यां नमः
3. भ्रौं मध्यमाभ्यां नमः
4. सः अनामिकाभ्यां नमः
5. राहवे कनिष्ठिकाभ्यां नमः
6. नमः करतल-करपृष्ठाभ्यां नमः
*अंग-न्यास*
1. ॐ भ्रां हृदयाय नमः
2. भ्रीं शिरसे स्वाहा
3. भ्रौं शिखायै वषट्
4. सः कवचाय हुं
5. राहवे नेत्रत्रयाय वौषट्
6. नमः अस्त्राय फट्
*हृदय-न्यास*
1. “ॐ हृदयाय नमः
2. भ्रां –”भ्रां शिरसे स्वाहा”
3. भ्रीं –”भ्रीं नेत्राभ्यां वषट्”
4. भ्रौं –”भ्रौं कण्ठाय हुम्”
5. सः –”सः भुजायुभ्यां फट्”
6. राहवे –”राहवे जंघाभ्यां वौषट्”
7. नमः –”नमः पादाभ्यां नमः”

राहु मंत्र का विनियोग
ऊँ कया निश्चत्रेति मंत्रस्य वामदेव ऋषि: गायत्री छन्द: राहुर्देवता: राहुप्रीत्यर्थे जपे

IMG 20251210 WA0036 

Don't forget to subscribe! Youtube Post Call Now +91 9560160184

विनोयोग:॥ दाहिने हाथ में जाप करते वक्त पानी या चावल ले लें,और यह मंत्र जपते हुये वे चावल या पानी राहुदेव की प्रतिमा या यंत्र पर छोड दें।
राहु मंत्र का देहागंन्यास
कया शिरसि। न: ललाटे। चित्र मुखे। आ कंठे । भुव ह्रदये। दूती नाभौ। सदा कट्याम। वृध: मेढ्रे सखा ऊर्वौ:। कया जान्वो:। शचिष्ठ्या गुल्फ़यो:। वृता पादयो:।
क्रम से सिर माथा मुंह कंठ ह्रदय नाभि कमर छाती जांघे गुदा और पैरों को उपरोक्त मंत्र बोलते हुये दाहिने हाथ से छुये।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe! Youtube Post Call 919560160184

राहु मंत्र का करान्यास

कया न: अंगुष्ठाभ्यां नम:। चित्र आ तर्ज्जनीभ्यां नम:। भुवदूती मध्यमाभ्यां नम:। सदावृध: सखा अनामिकाभ्यां नम:। कया कनिष्ठकाभ्यां नम:। शचिष्ट्या वृता करतलपृष्ठाभ्यां नम:॥
*राहु मंत्र का ह्रदयान्यास*
कयान: ह्रदयाय नम:। चित्र आ शिर्षे स्वाहा। भुवदूती शिखायै वषट। सदावृध: सखा कवचाय: हुँ। कया नेत्रत्रयाय वौषट। शचिष्ठ्या वृता अस्त्राय फ़ट।
*राहु मंत्र के लिये ध्यान*
नीलाम्बरो नीलवपु: किरीटी करालवक्त्र: करवालशूली। चतुर्भुजश्चक्रधरश्च राहु: सिंहाधिरूढो वरदोऽस्तु मह्यम॥ राहु गायत्री नीलवर्णाय विद्यमहे सैहिकेयाय धीमहि तन्नो राहु: प्रचोदयात ।
*राहु का वैदिक बीज मंत्र*
ऊँ भ्राँ भ्रीँ भ्रौँ स: ऊँ भूर्भुव: स्व: ऊँ कया नश्चित्रऽआभुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठ्या व्वृता ऊँ स्व: भुव: भू: ऊँ स: भ्रौँ भ्रीँ भ्राँ ऊँ राहुवे नम:॥
*राहु का जाप मंत्र*
ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहुवे नम:॥ १८००० बार रोजाना,शांति मिलने तक॥
*राहु स्तोत्र*
राहु: दानव मन्त्री च सिंहिकाचित्त नन्दन:। अर्धकाय: सदा क्रोधी चन्द्र आदित्य विमर्दन:॥ रौद्र: रुद्र प्रिय: दैत्य: स्वर-भानु:-भानु भीतिद:। ग्रहराज: सुधा पायी राकातिथ्य-अभिलाषुक:॥ काल दृष्टि: काल रूप: श्री कण्ठह्रदय-आश्रय:। विधुन्तुद: सैहिकेय: घोर रूप महाबल:॥ ग्रह पीडा कर: दंष्ट्री रक्त नेत्र: महोदर:। पंचविंशति नामानि स्मृत्वा राहुं सदा नर:॥ य: पठेत महतीं पीडाम तस्य नश्यति केवलम। आरोग्यम पुत्रम अतुलाम श्रियम धान्यम पशून-तथा॥ ददाति राहु: तस्मै य: पठते स्तोत्रम-उत्तमम। सततम पठते य: तु जीवेत वर्षशतम नर:॥
*राहु मंगल स्तोत्र*
राहु: सिंहल देश जश्च निऋति कृष्णांग शूर्पासनो। य: पैठीनसि गोत्र सम्भव समिद दूर्वामुखो दक्षिण:॥ य: सर्पाद्यधि दैवते च निऋति प्रत्याधि देव: सदा। षटत्रिंस्थ: शुभकृत च सिंहिक सुत: कुर्यात सदा मंगलम॥

उपरोक्त दोनो स्तोत्रों का नित्य १०८ पाठ करने से राहु प्रदत्त समस्त प्रकार की कालिमा भयंकर क्रोध अकारण मस्तिष्क की गर्मी अनिद्रा अनिर्णय शक्ति ग्रहण योग पति पत्नी विवाद तथा काल सर्प योग सदा के लिये समाप्त हो जाते हैं,
स्तोत्र पाठ करने के फ़लस्वरूप अखंड शांति योग की परिपक्वता पूर्ण निर्णय शक्ति तथा राहु प्रदत्त समस्त प्रकार के कष्टों से निवृत्ति हो जाती है।

View Services Book Appointment Location / Directions General Enquiry Diksha Enquiry
Call
Scroll to Top