उपनिषद वाणी
Mantra Sadhanaउपनिषद वाणी JAI GURUDEV सारा संसार माया के विविध रूपों से घिरा हुआ है। हमारे चिन्तन का स्वरूप भी माया

उपनिषद वाणी JAI GURUDEV सारा संसार माया के विविध रूपों से घिरा हुआ है। हमारे चिन्तन का स्वरूप भी माया
Maheswari Tantra महेश नवमीं 03 जून 2017 शिव का पौराणिक स्वरूप ‘महेश’ विलय, संहार, परिवर्तन के देव शत्रु बाधा, वाद-विवाद,
GURU DIKSHA गूरूमंत्र की महिमागुरुमंत्रो मुखे यस्य तस्य सिद्धयन्ति नान्यथा |दीक्षया सर्वकर्मणी सिद्धयन्ति गुरुपुत्रके || ” जिसके मुख में गुरुमंत्र
Bhuvaneshwari is one of the ten Mahavidyas, the supreme forms of the Goddess who represent different aspects of the cosmic
सिद्धि लक्ष्मी स्तोत्रम्॥ शरदपूर्णिमा से पूरे कार्तिक पूर्णिमा तक लक्ष्मी साधनाएं अवश्य करनी चाहिए।श्री गणेशाय नमः। श्री गुरुवे नम:!!ॐ अस्य