- 🌿 क्या आपकी बुद्धि, निर्णय-क्षमता और संवाद शक्ति बार-बार धोखा दे रही है?
कभी-कभी हम बहुत परिश्रम करते हैं, पर सही समय पर सही शब्द नहीं निकलते।
कभी अवसर सामने होता है, पर मन भ्रमित रहता है।
कभी पढ़ाई, व्यापार, नौकरी या रिश्तों में एक अदृश्य मानसिक अवरोध महसूस होता है।
शास्त्र कहते हैं — यह स्थिति प्रायः बुध ग्रह की असंतुलित अवस्था का संकेत होती है।
और इसका सबसे शुद्ध, सुरक्षित और मनोवैज्ञानिक समाधान है बुध स्तोत्र।
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नीचे दिया गया स्तोत्र जैसा है वैसा ही पूर्णतः सुरक्षित रखा गया है।
इसे पढ़ते समय शब्द नहीं, भाव और एकाग्रता मुख्य है।
—
🌙 ॥बुध स्तोत्र॥
विनियोग
अस्य श्रीबुधस्तोत्रमहामन्त्रस्य वसिष्ठ ऋषिः ।
अनुष्टुप् छन्दः ।
बुधो देवता ।
बुधप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥
ध्यान
ध्यानम्भुजैश्चतुर्भिर्वरदाभयासिगदं वहन्तं सुमुखं प्रशान्तम् ।
पीतप्रभं चन्द्रसुतं सुरेढ्यं सिम्हे निषण्णं बुधमाश्रयामि ॥
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स्तोत्र पाठ
पीताम्बरः पीतवपुः किरीटी चतुर्भुजो देवदुःखापहर्ता ।
धर्मस्य धृक् सोमसुतः सदा मे सिंहाधिरूढो वरदो बुधश्च ॥ १॥
प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम् ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम् ॥ २॥
सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्यः सौम्यगुणान्वितः ।
सदा शान्तः सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम् ॥ ३॥
उत्पातरूपी जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युतिः ।
सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीडां हरतु मे बुधम् ॥ ४॥
शिरीषपुष्पसंकाशं कपिलीशो युवा पुनः ।
सोमपुत्रो बुधश्चैव सदा शान्तिं प्रयच्छतु ॥ ५॥
श्यामः शिरालश्च कलाविधिज्ञः कौतूहली कोमलवाग्विलासी ।
रजोधिको मध्यमरूपधृक् स्यादाताम्रनेत्रो द्विजराजपुत्रः ॥ ६॥
अहो चन्द्रासुत श्रीमन् मागधर्मासमुद्भवः ।
अत्रिगोत्रश्चतुर्बाहुः खड्गखेटकधारकः ॥ ७॥
गदाधरो नृसिंहस्थः स्वर्णनाभसमन्वितः ।
केतकीद्रुमपत्राभः इन्द्रविष्णुप्रपूजितः ॥ ८॥
ज्ञेयो बुधः पण्डितश्च रोहिणेयश्च सोमजः ।
कुमारो राजपुत्रश्च शैशवे शशिनन्दनः ॥ ९॥
गुरुपुत्रश्च तारेयो विबुधो बोधनस्तथा ।
सौम्यः सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रदः ॥ १०॥
एतानि बुधनामानि प्रातः काले पठेन्नरः ।
बुद्धिर्विवृद्धितां याति बुधपीडा न जायते ॥ ११॥
॥ इति बुध स्तोत्रं ॥
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🌼 बुध स्तोत्र की महिमा (मनोवैज्ञानिक दृष्टि से)
🔹 यह स्तोत्र मन की गति को स्थिर करता है
🔹 निर्णय लेते समय आने वाला भ्रम धीरे-धीरे शांत होता है
🔹 बोलने की शैली, तर्क-शक्ति और स्मरण-शक्ति में स्वाभाविक निखार आता है
🔹 पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा, व्यापार, लेखन, ज्योतिष, वाणी-आधारित कार्यों में विशेष सहायक
🔹 बुध पीड़ा के साथ-साथ अति-चंचल बुद्धि को भी संतुलित करता है
शास्त्रों में बुध को बुद्धि का प्राण कहा गया है।
जब बुध शांत होता है —
तो मन स्पष्ट सोचता है,
वाणी सही समय पर सही शब्द देती है,
और कर्म का फल सटीक दिशा में जाता है।
📿 कैसे पढ़ें?
✔ प्रातःकाल स्नान के बाद
✔ हरे या पीले वस्त्र में
✔ शांत मन से, बिना जल्दबाज़ी
✔ कम से कम 1 बार, विशेष लाभ हेतु 3 या 7 बार
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🙏 यदि यह स्तोत्र आपके मन को स्पर्श करे, तो इसे सहेज कर रखें और आवश्यक व्यक्ति तक पहुँचाएँ।
🧠 बुद्धि का जागरण एक साधना है — और बुध स्तोत्र उसका श्रेष्ठ द्वार।
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